वैरिकोज़ वेन्स के इलाज की सबसे अहम पर सबसे कम चर्चित बात है — जाँच। और उसमें सबसे ज़रूरी है कलर डॉपलर टेस्ट। इलाज उतना ही अच्छा होता है जितनी सटीक इसकी मैपिंग। आइए समझें यह क्या है और क्यों इसके बिना इलाज नहीं होना चाहिए।
कलर डॉपलर क्या है?
कलर डॉपलर एक विशेष अल्ट्रासाउंड है जो नसों और धमनियों में खून के बहाव को रंगों में दिखाता है। इससे पता चलता है कि खून किस दिशा में बह रहा है, कहाँ रुक रहा है, और कौन-से वॉल्व खराब हैं (जिसे रिफ्लक्स कहते हैं)।
यह क्यों ज़रूरी है?
- सही नस की पहचान — बाहर दिखने वाली उभरी नस अक्सर असली समस्या नहीं होती; असली खराबी गहरी नस के वॉल्व में हो सकती है। डॉपलर वही ढूँढता है।
- DVT रद्द करना — इलाज से पहले यह पक्का किया जाता है कि गहरी नस में थक्का तो नहीं।
- तकनीक का चुनाव — नस का आकार और स्थान देखकर तय होता है कि लेज़र, RFA, ग्लू या स्क्लेरोथेरेपी में से क्या सही है।
- दोबारा होने से बचाव — “इलाज के बाद नसें फिर आ गईं” के ज़्यादातर मामले अधूरी मैपिंग के कारण होते हैं।
जाँच कैसी होती है?
यह पूरी तरह दर्द-रहित है — न सुई, न रेडिएशन। त्वचा पर जेल लगाकर एक प्रोब घुमाया जाता है। खड़े और लेटे दोनों स्थिति में नसें देखी जाती हैं। इसमें 20–30 मिनट लगते हैं और रिपोर्ट व राय उसी दिन मिल जाती है — यही कारण है कि बाहर से आने वाले मरीज़ (दौसा, टोंक, सीकर आदि) एक ही दिन में जाँच और इलाज-योजना दोनों करवा सकते हैं।
इलाज से पहले सही जाँच ज़रूरी है। डॉ. निखिल बंसल (MD, PGDHHM, FVIR, FIPM) खुद डॉपलर मैपिंग करते हैं और उसी दिन इलाज-योजना बताते हैं। बाहर से आ रहे हैं? पहले WhatsApp पर रिपोर्ट भेज सकते हैं। 📞 +91-97824 15566 · WhatsApp करें
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या कलर डॉपलर में दर्द होता है?
बिल्कुल नहीं। यह त्वचा पर जेल और प्रोब से होने वाली दर्द-रहित जाँच है — न सुई, न रेडिएशन।
क्या वैरिकोज़ वेन्स के इलाज से पहले डॉपलर ज़रूरी है?
हाँ। मैपिंग के बिना इलाज अधूरा और दोबारा होने का जोखिम बढ़ाता है। यह सही इलाज की पहली सीढ़ी है।
रिपोर्ट कब मिलती है?
आमतौर पर उसी दिन, और डॉक्टर उसी बैठक में इलाज-योजना बता देते हैं।
Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के लिए है और डॉक्टर की व्यक्तिगत सलाह का विकल्प नहीं है।


