कुछ साल पहले तक जो बीमारी सिर्फ अस्पतालों में लंबे समय तक भर्ती रहने वाले मरीजों तक सीमित मानी जाती थी, आज वही बीमारी IT professionals, homemakers, और यहां तक कि young adults में भी तेजी से देखी जा रही है। पैरों में सूजन, भारीपन और लगातार दर्द लेकर आने वाले मरीजों की संख्या पिछले कुछ सालों में साफ तौर पर बढ़ी है — और ज्यादातर मामलों में यह सिर्फ थकान नहीं, बल्कि DVT यानी Deep Vein Thrombosis का शुरुआती संकेत निकलता है। यह एक ऐसी बीमारी है जो जानलेवा भी बन सकती है, लेकिन राहत की बात यह है कि समय पर diagnosis हो जाए, तो यह एक आम इलाज से पूरी तरह ठीक भी हो जाती है।
मैं Dr. Nikhil Bansal, Professor and Head, Department of Interventional Radiology। मेरे पास रोज़ ऐसे मरीज आते हैं जो महीनों से पैरों की सूजन को नजरअंदाज करते रहे। WHO यानी World Health Organization की रिपोर्ट्स भी यही कहती हैं कि पैरों की बीमारियां दुनिया भर में सबसे ज्यादा neglected health issues में से हैं, और भारत में तो यह संख्या और भी ज्यादा है।
पैरों में थक्का जमने के केस इतनी तेजी से क्यों बढ़ रहे हैं?
इसका सीधा जवाब है — awareness की कमी और lifestyle में बदलाव। ज्यादातर लोग सूजन को “थोड़ा rest कर लो” या “painkiller खा लो” कहकर टाल देते हैं, जबकि यही रवैया एक treatable बीमारी को emergency में बदल देता है। कुछ प्रमुख वजहें जो DVT के cases को बढ़ा रही हैं —
- Sedentary lifestyle — लंबे समय तक desk job पर बैठे रहना या एक जगह खड़े रहना
- Long-distance travel — बिना पैर हिलाए घंटों की flight या car journey
- Post-surgery immobility — surgery या hospital stay के बाद लंबे समय तक bed rest
- Neglected varicose veins — जिन्हें लोग सालों तक इलाज न करवाकर छोड़ देते हैं, जब तक कि वो deep vein को भी प्रभावित न कर दें
- Cancer और अन्य chronic बीमारियां — जो शरीर की movement और activity को कम कर देती हैं
- घर संभालने वाली महिलाओं और लगातार काम करने वाले लोगों में सूजन को “normal” मान लेने की आदत
अगर आप Jaipur में रहते हैं और बिना किसी वजह के पैरों में सूजन या दर्द से जूझ रहे हैं, तो Dr. Nikhil Bansal – DVT Treatment Specialist in Jaipur से समय रहते सलाह लेना जरूरी है — यही एक साधारण recovery और एक बड़ी complication के बीच का फर्क तय करता है।
DVT असल में है क्या?
हमारे हृदय से खून पैरों तक पहुंचता है, और veins के जरिए वह वापस ऊपर आता है। इसमें दो तरह की नाड़ियां शामिल होती हैं —
- Deep vein — मुख्य नाड़ी, जो ज्यादातर खून को वापस heart की तरफ ले जाती है
- Superficial vein — skin के करीब मौजूद छोटी नाड़ियां
जब deep vein में थक्का जम जाता है, तो उसे Deep Vein Thrombosis (DVT) कहते हैं। जब यही समस्या superficial vein में होती है, तो उसे आम भाषा में varicose vein कहते हैं। ज्यादातर DVT cases असल में neglect की गई varicose veins से ही शुरू होते हैं।
एक छोटा सा थक्का Life-Threatening कैसे बन जाता है?
खून का बहाव पैरों से हृदय की तरफ, और हृदय से फेफड़ों की तरफ जाता है — जहां वह fresh oxygen लेकर वापस पूरे शरीर में circulate होता है। अगर deep vein का थक्का टूटकर इसी रास्ते से हृदय या फेफड़ों तक पहुंच जाए, तो वह किसी blood vessel को अचानक block कर सकता है। इस स्थिति को pulmonary embolism कहते हैं, और यह कुछ ही मिनटों में जानलेवा साबित हो सकता है। यही वजह है कि risk of blood clot in leg को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए।
Blood Clot in Leg Symptoms जिन्हें कभी नजरअंदाज न करें
अगर आपके पैरों में बहुत दिनों से सूजन है, या सूजन बढ़ती जा रही है, पैर भारी हो गया है, त्वचा खिंचने लगी है, या दर्द बढ़ता जा रहा है — तो सतर्क हो जाएं। शुरुआती blood clot in leg symptoms इस प्रकार हैं —
- एक पैर में (कभी-कभी दोनों में) सूजन जो लगातार बढ़ती जाए
- पैर में heavy, tired या दुखने वाला feeling
- चलते वक्त या देर तक खड़े रहते वक्त दर्द बढ़ जाना
- skin का tight, shiny, या छूने पर warm महसूस होना
- सूजन जो rest करने के बाद भी हर दिन बढ़ती जाए
क्या करें: अगर ये DVT symptoms कुछ दिनों के rest के बाद भी कम नहीं होते, या बार-बार वापस आते हैं, तो proper medical evaluation जरूर करवाएं।
DVT का diagnosis कैसे होता है?
एक अनुभवी doctor अक्सर सिर्फ physical examination से ही DVT का clinical diagnosis कर सकता है। Confirm करने के लिए Colour Doppler Ultrasound किया जाता है — एक painless, safe, और हर जगह आसानी से available test, जो थक्के की location, size और spread साफ-साफ दिखा देता है।
DVT Treatment के Options क्या हैं?
DVT treatment इस बात पर depend करता है कि clot कितनी जल्दी पकड़ा गया।
Early stage में — blood-thinning medicines अक्सर काफी होती हैं। यह दवाइयां थक्के को बढ़ने से रोकती हैं, जबकि शरीर उसे धीरे-धीरे naturally तोड़ने देता है।
जब सिर्फ medicine से काम न चले — एक पतली catheter को needle के through सीधे clot तक पहुंचाया जाता है। एक syringe या Penumbra machine जैसे suction device की मदद से clot को खींचकर निकाला जाता है — बिल्कुल किसी blocked नाली को साफ करने जैसा।
अगर clot के chest की तरफ जाने का खतरा हो — तो एक छतरी जैसी device, IVC filter, kidney के नीचे वाली vein में लगाई जाती है, जो टूटे हुए clot fragments को पकड़ लेती है।
क्या फायदा है: इन procedures में ज्यादातर बड़ी surgery, blood transfusion या general anaesthesia की जरूरत नहीं पड़ती। ये local anaesthesia में ही हो जाते हैं, और patient उसी दिन या अगले दिन घर जा सकता है।
Treatment Delay करने पर क्या होता है?
- Risk 1: Untreated clot टूटकर lungs तक पहुंच सकता है — जानलेवा pulmonary embolism
- Risk 2: महीनों तक untreated रहने से Post-Thrombotic Syndrome हो सकता है — permanent सूजन, skin का काला पड़ना, न भरने वाले घाव, lymphedema, और secondary varicose veins
निष्कर्ष
पैरों में थक्का जमने के cases सिर्फ इसलिए नहीं बढ़ रहे क्योंकि बीमारी नई है — बल्कि इसलिए क्योंकि हमारी lifestyle और awareness की कमी ने इसे बढ़ावा दिया है। अगर आपको varicose vein है, तो समय से इलाज कराएं। अगर DVT diagnose हो चुका है, तो थक्के को जल्दी निकलवाएं। अगर आपको या आपके family में किसी को persistent leg swelling, दर्द या heaviness महसूस हो रहा है, तो देर न करें — Dr. Nikhil Bansal से तुरंत संपर्क करें।


